आवास का स्थगन फिर भी मकान ढहाने पहुंचा प्रशासन, मकान ढहाने को लेकर नगर निरीक्षक व महिला के साथ हुई जमकर बहसबाजी

आवास का स्थगन फिर भी मकान ढहाने पहुंचा प्रशासन, मकान ढहाने को लेकर नगर निरीक्षक व महिला के साथ हुई जमकर बहसबाजी

कुदाल से फाटक तोड़ता प्रशासन, विलखते मासूम बच्चे


सीधी। साहब मेरा छोटा सा घर है, इसे मत तोडि़ए, इस गर्मी और बारिश में हम लोग कहां रहेंगे, मासूम बच्चों की इस तरह की फरियाद के बाद भी प्रशासन का दिल नहीं पसीजा और सिविल न्यायालय से स्थगन होने के बाद भी प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीन से मकान धराशाई करा दिया गया। इस दौरान नगर निरीक्षक द्वारा एक महिला के मना करने पर जमकर बहसबाजी की गई। गुस्से में आकर नगर निरीक्षक द्वारा महिला आरक्षक से महिला के साथ हाथापाई करवाने पर उतारू हो गए।

क्या है पूरा मामला-

भूमिहीनों के लिए घर बनाने के लिए शासन द्वारा मुख्यमंत्री पट्टा वितरण कार्यक्रम के तहत विधवा रन्नू देवी पति स्व. भगवानदीन कहार को सम्राट चौक के पास शासकीय भूमि का पट्टा दिया गया था, जहां विधवा महिला ने आवास का निर्माण करवाया था, उक्त जमीन के आस-पास शासकीय जमीन पर डीजे प्लाजा का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है। प्लाजा के बीच में यह आवास पड़ता है, जिससे संविदाकारों के द्वारा लंबे समय से महिला का आवास खाली करवाने का प्रयास कर रहे हैं, जिस पर महिला ने सिविल कोर्ट में आवेदन देकर स्थगन प्राप्त की, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड सोनम रघुवंशी की न्यायालय ने महिला को तीन माह का स्थगन दिया गया। इसके बाद भी तहसीलदार गोपद बनास जान्हवी शुक्ला द्वारा पुलिस बल के साथ भवन गिराने पहुंच गई।

स्थगन की कांपी आने तक नहीं किए इंतजार-


जिस समय प्रशासन भवन गिराने स्थल पर पहुंचा उस समय रन्नू कहार घर में मौजूद नहीं थी, उसकी पुत्री निर्मला सोंधिया के द्वारा नगर निरीक्षक अभिषेक उपाध्याय से कहा गया कि न्यायालय से स्थगन है, मेरी मां आ रही है, उनके आने तक रुक लीजिए, किंतु नगर निरीक्षक महिला आरक्षक से युवती को घसीटकर एक किनारे कर दिया गया और कुदाल से दरवाजा तोडक़र सामान को बाहर फेंक दिया गया।

जर्जर घर में रहने को मजबूर परिजन-

स्थगन आदेश दिखाने से पूर्व ही तहसीलदार द्वारा जेसीबी से आधा मकान धराशाई करवा दिया गया, जब स्थगन की प्रति उपलब्ध करवाई गई तब कहा गया कि तीन माह बाद हम फिर आएंगे और फिर जेसीबी से पूरा भवन गिरवा दूंगी, इससे पहले दूसरी जगह अपनी ब्यवस्था बना लो। ऐसी स्थिति में परिजन जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं, जिस दिन तेज बारिश हुई तो जर्जर भवन के गिरने से गंभीर हादसा हो सकता है।

All Rights Reserved To "Samay Savera" © Copyright Protected 2013 - 2024