👉 नगरीय निकायों के आरक्षण की प्रक्रिया आज भोपाल में होने पर नगरपालिका सीधी के अध्यक्ष का पद अनारक्षित होने की खबर फैलते ही सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनैतिक दलों से सम्बंध कई लोग अपनी दावेदारी को पुख्ता करने के लिए सक्रिय हो गये हैं। 24 वार्डों मेंं विभाजित नगरपालिका परिषद सीधी के निर्वाचन में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता रहा है। इसी वजह से उक्त दोनो दलों की ओर से अध्यक्ष पद की दावेदारी पुख्ता करने के लिए आने वाले दिनों में घमासान की स्थिति रहेगी। बताते चलें कि कमलनाथ सरकार के दौरान नगरीय निर्वाचन के लिए हुई आरक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ माह पहले ही नगरपालिका सीधी का अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हुआ था। उसके बाद से कई महिलाओं द्वारा अपनी दावेदारी शुरू की गई थी। किन्तु निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू न होने और कमलनाथ सरकार के गिर जाने के बाद से पूरे प्रदेश में ही नगरीय निर्वाचन के सम्पन्न हुये आरक्षण को भाजपा सरकार द्वारा निरस्त कर नये सिरे से आरक्षण कराया गया। आरक्षण की कार्यवाई आज सम्पन्न होने के बाद से लगभग सभी नगरीय निकाय क्षेत्रों में राजनैतिक समीकरण भी बदल चुके हैं। नगरपालिका सीधी के अनारक्षित होने के बाद से यहां कांटे का संघर्ष निर्वाचन में रहेगा। इस वजह से राजनैतिक जानकार भी मानते हैं कि भाजपा और कांग्रेस की ओर से ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी घोषित किया जायेगा जिसका समर्थन नगरीय क्षेत्र के मतदाता करें। उधर मतदाताओं की निगाह भी निर्वाचन की घोषित होने वाली तिथि एवं चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को लेकर टिक चुकी है। नगरपालिका परिषद सीधी का निर्वाचन कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव के 2 वर्ष बाद नगरपालिका सीधी के होने वाले निर्वाचन में भाजपा और कांग्रेस दोनो की अग्निपरीक्षा होगी। भाजपा के समक्ष अपनी पूर्व की लोकप्रियता को कायम रखने जहां चुनौती रहेगी वहीं कांग्रेस के सामने 15 वर्ष बाद नगर पालिका पर कब्जा जमाने की चुनौती रहेगी। दरअसल सीधी के शहरी क्षेत्र में नगरपालिका क्षेत्र के बाहर की कई समीपी ग्राम पंचायतें भी लगी हुई हैं। यहां के लोगों को कई सालों से इंतजार था कि नगरपालिका परिषद सीधी के क्षेत्र का विस्तारीकरण होगा और उन्हें भी शहरी क्षेत्र के समान सुविधाएं मिलेंगी। कई बार इसके लिए प्रस्ताव राज्य शासन के पास भेजा गया लेकिन अनुमति न मिलने के कारण नगर पालिका का क्षेत्र 24 वार्डों में ही सिमटा हुआ है। यदि नये वार्ड शामिल हो जाते तो नगरपालिका की जनसंख्या भी बढ़ जाती और उसकी दावेदारी नगर निगम के लिए हो जाती। अब यह सब फिलहाल टल चुका है और निर्वाचन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
👉 वर्ष 1946 में बनी थी नगरपालिका ।
राजतंत्र के जमाने में नगरपालिका सीधी वर्ष 1946 में अस्तित्व में आई थी। रीवा रियासत के महाराजा मार्तण्ड सिंह के नेतृत्व में यहां अध्यक्ष का मनोनयन होता था। वर्ष 1964 तक रीवा रियासत के नियंत्रण में ही नगरपालिका सीधी का संचालन होता रहा। वर्ष 1964 में कतिपय कारणों से नगरपालिका भंग हो गई। वर्ष 1964 से 1968 तक द्वारिका प्रसाद गुप्ता ने नगरपालिका की कमान संभाली। फिर वर्ष 1968 में अध्यक्ष का पद कांग्रेस के जगदीश खरे के हांथों में चली गई। उस दौरान नगरपालिका परिषद सीधी में कुल 6 वार्ड होते थे। उस दौरान कांग्रेस समर्थित लोगों के हांथ में ही नगरपालिका की कमान थी। पहली मर्तबा वर्ष 1969 में जनता को नगरपालिका के जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला। निर्वाचन के बाद जनसंघ के दिवाकर सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1972 से ही मीसाबंदी की आहट शुरू हो जाने के कारण उन्हें पद छोडऩा पड़ा। इसके बाद से निर्वाचन के माध्यम से ही अध्यक्ष निर्वाचित होतेे रहे और अधिकांशत: कांग्रेस का कब्जा ही नगरपालिका में बना रहा। यह अवश्य है विगत 15 वर्षों से भाजपा का कब्जा नगरपालिका सीधी में रहा।