आरोपी के दादी के नाम पर था पैत्रिक घरबेघर किए जाने के विरोध में उतरे जिले के ब्राम्हण संगठन
एनओसी के बहाने ढहा दिया मकान
आरोपी के पिता रमाकांत शुक्ला ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि 5 जुलाई को जिला प्रशासन द्वारा जो हमें नोटिस दिखाई गई थी उसमें ग्राम पंचायत के द्वारा मकान निर्माण की अनुमति न लिए जाने के कारण मकान निर्माण अवैध करार करते हुए घर गिराया गया। हमें सिर्फ नोटिस दिखाई गई दी नहीं गई।
उन्होने बताया कि उक्त नोटिस में 24 घंटे का समय दिया गया था लेकिन नोटिस दिखाने के आधे घंटे बाद ही घर पर बुलडोजर चला दिया गया। जिला ही नहीं पूरे प्रदेश का यह ऐसा मामला है जिसमें भवन निर्माण की स्वीकृति ग्राम पंचायत से न लिए जाने के कारण पैतृक मकान को अवैध करार दे दिया गया और उसे जमींदोज कर दिया गया। अभी तक नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद के द्वारा मकान निर्माण की अनुमति दी जाती थी। ग्राम पंचायतों में रहने वाले ग्रामीणजन बिना किसी अनुमति के ही अपनी भूमियों पर मकान निर्माण करते रहे हैं। आरोपी के पिता एवं परिवारजन के विरुद्ध कोई पुलिस प्रकरण अभी तक दर्ज नहीं था। वह समाज में काफी प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। इस कारण प्रशासन के पास उनका मकान गिराने के लिए कोई ठोस आधार नहीं था इसलिए पंचायत से अनुमति का सहारा लिया गया।
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