सीधी/सिंगरौली। सीधी–सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग-39 परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित आधिकारिक पत्र में दावा किया गया है कि सड़क के शेष कार्य से जुड़ी बिडिंग प्रक्रिया को प्रशासनिक कारणों से निरस्त कर दिया गया है।
इस परियोजना के लिए पहले भी अलग-अलग स्तर पर टेंडर जारी किए जा चुके हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, सीधी–सिंगरौली खंड के शेष कार्य, चौड़ीकरण, पुनर्वास और उन्नयन से जुड़ी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। इसी क्रम में 2025 में लगभग 396 करोड़ रुपये की लागत वाला टेंडर भी सामने आया था, जिसमें करीब 105 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार-लेन और paved shoulder के साथ विकसित किए जाने की बात कही गई थी।
यह परियोजना वर्षों से अधूरी बनी हुई है। 2008 के आसपास स्वीकृत इस सड़क के बारे में समय-समय पर अलग-अलग कार्यादेश, संशोधित समयसीमा और प्रगति से जुड़े अपडेट सामने आते रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। 2023 और 2025 की रिपोर्टों में भी इस सड़क की खराब स्थिति, निर्माण में देरी और लगातार बढ़ती लागत को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मार्च 2026 में इस खंड के शेष निर्माण कार्य को लेकर कार्य आरंभ किए जाने की घोषणाएं भी सामने आई थीं। उन घोषणाओं में तीन बड़े पुल, कई छोटे पुल, रेलवे ओवरब्रिज, अंडरब्रिज और सैकड़ों कलवर्ट बनाने की बात कही गई थी। इससे परियोजना को लेकर नई उम्मीद बनी थी कि अब काम तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
लेकिन अब बिडिंग प्रक्रिया निरस्त किए जाने के दावे ने एक बार फिर स्थिति को अस्पष्ट कर दिया है। यदि यह पत्र वास्तविक है, तो इसका अर्थ होगा कि परियोजना के एक और चरण पर विराम लग गया है। फिलहाल पत्र की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है, लेकिन इसकी विषयवस्तु उस परियोजना से मेल खाती है, जो पिछले कई वर्षों से क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण अधोसंरचना योजनाओं में गिनी जाती रही है।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के विभिन्न विधायक, सांसद और मंत्रियों ने इस सड़क के निर्माण, स्वीकृति और आगे बढ़ने को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से श्रेय लिया है। इसमें वर्तमान सांसद का नाम भी सामने आता रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही है कि अलग-अलग समय पर सड़क निर्माण, मरम्मत और कार्यादेश को लेकर राजनीतिक दावे किए जाते रहे हैं।
स्थानीय लोगों और यात्रियों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग परियोजना की स्थिति पर स्पष्ट और आधिकारिक बयान जारी करे, ताकि यह तय हो सके कि काम वास्तव में किस चरण में है और आगे की समयसीमा क्या होगी।
