सीधी। कजलियां जिसे खजुलईयां भी कहा जाता हैं मुख्यरूप से रक्षाबंधन के दूसरे दिन की जाने वाली एक परंपरा है। जिसमें नाग पंचमी के दूसरे दिन खेतों से लाई गई मिट्टी को बर्तनों में भरकर उसमें गेहूं बो दिये जाते हैं और उन गेंहू के बीजों में रक्षाबंंधन के दिन तक गोबर की खाद् और पानी दिया जाता है। साथ ही अच्छे से देखभाल की जाती है। जब ये गेंहू के छोटे-छोटे पौधे उग आते हैं तो इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि इस बार फसल कैसी होगी।
ऐसे दिए जाती है कजलियां ।
गेंहू के इन छोटे-छोटे पौधों को कजलियां कहते हैं। कजलियां वाले दिन घर की लड़कियों द्वारा कजलियां के कोमल पत्ते तोडकर घर के पुरूषों के कानों के ऊपर लगाया जाता है, जिससे बाद पुरूषों द्वारा लड़कियों को शगुन भी दिये जाते हैं।
एक दूसरे को देते है शुभकामनांए ।
इस पर्व में कजलिया लगाकर लोग एक दूसरे की शुभकामनाये के रूप कामना करते है कि सब लोग कजलिया की तरह खुश और धन धान्य से भरपूर रहे इसी लिए यह पर्व सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
